किम जोंग से पहले 22 मई को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की मेजबानी करेंगे डोनाल्ड ट्रंप - Only Hit Lyrics

किम जोंग से पहले 22 मई को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की मेजबानी करेंगे डोनाल्ड ट्रंप

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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 22 मई को व्हाइट हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन से मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ट्रंप की किम जोंग उन से होने जा रही मुलाकात से पहले हो रही है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा हकाबी सैंडर्स ने जारी बयान में कहा, "दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी मुलाकात अमेरिका, दक्षिण कोरिया के मजबूत होते संबंधों और गहरी होती दोस्ती को दर्शाता है."


समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, ट्रंप और मून कोरियाई प्रायद्वीप के संदर्भ में विभिन्न मुद्दों पर समन्वय बनाए रखेंगे और 27 अप्रैल को हुए अंतर कोरियाई सम्मेलन और किम जोंग के साथ ट्रंप की आगामी बैठक पर चर्चा करेंगे. इससे पहले शुक्रवार (4 मई) को ट्रंप ने कहा था कि किम जोंग उन के साथ मुलाकात का समय और तारीख निर्धारित कर ली गई है और जल्द ही इसके बारे में सूचित किया जाएगा.


किम जोंग ने घड़ी की सुइयों को आधा घंटा बढ़ाया, उत्तर एवं दक्षिण कोरिया का टाइम जोन एक
वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया ने शनिवार (5 मई) को अपनी घड़ी की सुइयां आधा घंटा आगे बढ़ाते हुए अपना टाइम जोन दक्षिण कोरिया के टाइम जोन के अनुरूप कर लिया. उत्तर कोरिया ने यह कदम दोनों देशों के बीच सुलह की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए उठाया है. समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, टाइम जोन में यह बदलाव उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन को यह बताने के एक सप्ताह बाद हुआ है कि वह अंतर कोरियाई सुलह और एकता को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के टाइम जोन्स को एक करना चाहते हैं. यह फैसला आधी रात से प्रभावी हुआ.


उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने एक बयान जारी कर कहा, "प्रेसिडयम ऑफ द सुप्रीम पीपुल्स असेंबली ऑफ उत्तर कोरिया के आदेश के मुताबिक, प्योंगयांग के समय को पुनर्निर्धारित किया गया है और यह पांच मई से प्रभावी हो गया. बयान के मुताबिक, "उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ऐतिहासिक बैठक के बाद दोनों देशों के टाइम जोन को एक करना पहला व्यवहारिक कदम है."


उत्तर कोरिया ने अगस्त 2015 में अपने मानक समय को दक्षिण कोरिया के समय के 30 मिनट पीछे कर दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि ऐसा 1910-1945 के बीच जापान के कोरियाई प्रायद्वीप पर शासन के निशानों को हटाने के लिए किया गया. इससे पहले दोनों कोरियाई देशों में एक समान मानक समय ही था.




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